गिंजो ठाकुर गॉंव पंचायत रांची जिला मुखयालय से 25 कि0 मी0 एवं प्रखण्ड मुखयालय 7 कि0 मी0 की दूरी पर स्थित है। इसके पूरब में खखरा पंचायत, पच्च्चिम में बाड़े पंचायत, दक्षिण में गुरूगाई पंचायत एवं उत्तर में बाडे पंचायत है। ठाकुर गॉंव एक ऐतिहासिक गॉंव है। यह पहले गिंजो राज्य के अर्न्तगत का एक गॉंव था।

गिंजो ठाकुर गॉंव पंचायत रांची जिला मुखयालय से 25 कि0 मी0 एवं प्रखण्ड मुखयालय 7 कि0 मी0 की दूरी पर स्थित है। इसके पूरब में खखरा पंचायत, पच्च्चिम में बाड़े पंचायत, दक्षिण में गुरूगाई पंचायत एवं उत्तर में बाडे पंचायत है। ठाकुर गॉंव एक ऐतिहासिक गॉंव है। यह पहले गिंजो राज्य के अर्न्तगत का एक गॉंव था।

गिंजो ठाकुर गॉंव पंचायत रांची जिला मुखयालय से 25 कि0 मी0 एवं प्रखण्ड मुखयालय 7 कि0 मी0 की दूरी पर स्थित है। इसके पूरब में खखरा पंचायत, पच्च्चिम में बाड़े पंचायत, दक्षिण में गुरूगाई पंचायत एवं उत्तर में बाडे पंचायत है। ठाकुर गॉंव एक ऐतिहासिक गॉंव है। यह पहले गिंजो राज्य के अर्न्तगत का एक गॉंव था।

 

गिंजो ठाकुर गॉंव पंचायत रांची जिला मुखयालय से 25 कि0 मी0 एवं प्रखण्ड मुखयालय

गिंजो ठाकुर गॉंव पंचायत रांची जिला मुखयालय से 25 कि0 मी0 एवं प्रखण्ड मुखयालय 7 कि0 मी0 की दूरी पर स्थित है। इसके पूरब में खखरा पंचायत, पच्च्चिम में बाड़े पंचायत, दक्षिण में गुरूगाई पंचायत एवं उत्तर में बाडे पंचायत है। ठाकुर गॉंव एक ऐतिहासिक गॉंव है। यह पहले गिंजो राज्य के अर्न्तगत का एक गॉंव था। इस गॉंव में 16वीं सदी से लोग रहते आए हैं। छोटा नागपुर महाराजा के वंच्चज जब मॉं भवानी द्रांकर एवं चिंतामनी जो एक चेतनाथ महात्मा के द्वारा दिया गया था वही मॉं भवानी द्रांकर को लेकर महाराजा के वंच्चज गिंजो राज्य में आए और यहीं पर मंदिर बनाकर मूर्ती की स्थापना की। यही मंदिर भवानी द्रांकर मंदिर के नाम से प्रसिद्ध है। तभी से इस गॉंव का नाम गिंजो ठाकुर गॉंव पड़ा जिसे अब संक्षेप में ठाकुर गॉंव कहते हैं। यहां पर बहुत पुराने समय में आदिवासियों द्वारा कोल्ह विद्रोह हुआ था जिसे जमीनदारों द्वारा दबा दिया गया था।

ठाकुर गॉंव पंचायत की कुल आबादी लगभग 8000 है। इस गॉंव में 8 टोले है। जिसमें 24 जातियॉं निवास करती हैं। सभी मुहल्ले एक दूसरे से जुड़े हुए हैं। साथ हीं सभी समुदाय के लोग एक दूसरे केपूरक हैं। इस पंचायत में तीन प्राथमिक विद्यालय, दो मध्य विद्यालय एवं दो उच्च विद्यालय हैं। यहां के अधिक्तर लोग कृद्गाी पर आधरित हैं। यहां की प्रमुख खेती धान है पर सब्जी की खेती भी प्रचूर मात्रा में होती है। इन सब्जियों को ट्रकों के माध्यम से दूसरे राज्यों एवं दूसरे जिलों में भेजा जाता है, जैसे- पच्च्चिम बंगाल, उड़ीसा, जमसेदपुर आदि। यह ग्राम पंचायत जिला मुखयालय एवं राजधनी रांची के करीब होने के बावजूद समुचित रूप से विकसित नहीं हो पाया है। कुछ लोग खेती के अलावा मजदूरी करके भी अपना जीविकोपार्जन कारते है। कुछ लोग नौकरी पेच्चा तथा कुछ व्यवसायी भी है। यहां कुछ एन0 जी0 ओ0 भी हैं जिनमें प्रमुख है ज्ञान वाटिका। ज्ञान वाटिका बहुत हीं कम द्राुल्क पर बच्चों को कम्प्यूटर तथा अंग्रेजी की च्चिक्षा देती है। ये संस्था महिलाओं को इकट्ठा कर एस0 एच0 जी0 ग्रुप बनाती हैं तथा सरकार की तरफ से मिलने वाली सुविधाओं, ट्रेनिंग आदि दिलवाने में सहायता करती है।

इस गॉंव का मुखय आर्कद्गाण मॉं भवानी द्रांकर का मंदिर, दुर्गा पूजा, मण्डा पूजा आदि महत्वपूर्ण हैं। यहां सरस्वती पूजा काफी धूम-धम से मनायी जाती है। कर्मा पूजा यहां के आदिवासियों कामुखय त्योहार है। इसमें प्रकृती की पूजा की जाती है।